10 फ़रवरी से UPI नियमों में बदलाव, सभी यूजर्स के लिए जानना जरूरी | UPI New Rules 2026

By Priya

Published On:

UPI New Rules 2026

UPI New Rules 2026 – आज 10 फरवरी 2026 से भारत में UPI (Unified Payments Interface) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं। डिजिटल पेमेंट के सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए इन नए नियमों की जानकारी रखना बेहद आवश्यक है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लाए गए ये बदलाव यूजर्स की सुरक्षा और बेहतर सेवा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

UPI ट्रांजेक्शन लिमिट में संशोधन

नए नियमों के तहत UPI ट्रांजेक्शन की लिमिट में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अभी तक सामान्य लेन-देन के लिए प्रति ट्रांजेक्शन एक लाख रुपये की लिमिट बनी हुई है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों जैसे हेल्थकेयर, एजुकेशन और शेयर मार्केट से जुड़े ट्रांजेक्शन के लिए यह लिमिट अलग-अलग हो सकती है। टैक्स पेमेंट और म्यूचुअल फंड निवेश के लिए पहले से ही बढ़ी हुई लिमिट उपलब्ध है, और इसमें और सुधार की संभावना है।

सिक्योरिटी फीचर्स में वृद्धि

यूजर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए UPI प्लेटफॉर्म पर अब अधिक सख्त सिक्योरिटी मापदंड लागू किए जा रहे हैं। इसमें मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, बेहतर एन्क्रिप्शन और फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं। अब संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने के लिए AI और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जो असामान्य ट्रांजेक्शन को तुरंत फ्लैग कर देता है।

KYC नियमों में सख्ती

नए नियमों के अनुसार UPI यूजर्स के लिए KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। जिन यूजर्स ने अपनी KYC पूरी नहीं की है, उन्हें अपने UPI अकाउंट को पूरी तरह एक्टिव रखने के लिए जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बिना पूर्ण KYC के यूजर्स को ट्रांजेक्शन में कुछ सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है। आधार लिंकिंग और बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन अब पहले से अधिक जरूरी हो गए हैं।

डॉर्मेंट अकाउंट्स की समीक्षा

जो UPI अकाउंट्स लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, उनके लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं। यदि किसी UPI ID का एक निश्चित अवधि तक उपयोग नहीं किया गया है, तो उसे डीएक्टिवेट किया जा सकता है। यूजर्स को अपने सक्रिय UPI अकाउंट्स को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ट्रांजेक्शन करते रहना चाहिए या कम से कम हर कुछ महीनों में एक बार लॉगिन जरूर करना चाहिए।

मर्चेंट पेमेंट्स में बदलाव

व्यापारियों और दुकानदारों के लिए UPI पेमेंट्स में भी नए नियम लागू हो रहे हैं। मर्चेंट कैटेगरी कोड (MCC) के आधार पर अलग-अलग शुल्क और लिमिट निर्धारित की जा रही हैं। छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजनाएं भी शुरू की जा सकती हैं, जबकि बड़े मर्चेंट्स के लिए अधिक पारदर्शिता और रिपोर्टिंग की आवश्यकता होगी।

रिफंड और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन में सुधार

नए नियमों में ग्राहकों की शिकायतों और रिफंड प्रोसेस को तेज और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। अब गलत या फेल ट्रांजेक्शन के मामले में रिफंड की समय सीमा और भी कम कर दी गई है। UPI प्लेटफॉर्म पर एक बेहतर ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म भी स्थापित किया जा रहा है, जिससे यूजर्स अपनी समस्याओं का तेजी से समाधान पा सकें।

डेटा प्राइवेसी और सूचना सुरक्षा

यूजर्स की निजता की सुरक्षा को लेकर भी नए मानदंड तय किए गए हैं। UPI ऐप्स को अब यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी को अधिक सुरक्षित तरीके से स्टोर और प्रोसेस करना होगा। डेटा ब्रीच की स्थिति में यूजर्स को तुरंत सूचित करने की बाध्यता भी लागू की गई है। तीसरे पक्ष के साथ डेटा शेयरिंग के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं।

UPI AutoPay और रेकरिंग पेमेंट्स

UPI AutoPay और रेकरिंग पेमेंट्स की सुविधा में भी कुछ बदलाव आए हैं। अब यूजर्स को अपने ऑटोमेटिक पेमेंट्स पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। रेकरिंग पेमेंट्स की लिमिट में संशोधन किया गया है और यूजर्स को हर ऑटो-डेबिट से पहले नोटिफिकेशन भी मिलेगा। यह सुविधा बिल भुगतान, सब्सक्रिप्शन और EMI के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

क्रेडिट कार्ड-UPI लिंकिंग के नियम

हाल ही में शुरू हुई क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करने की सुविधा में भी नए दिशा-निर्देश लागू हो रहे हैं। इसमें ट्रांजेक्शन लिमिट, ब्याज दर और रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े नियम शामिल हैं। यूजर्स को अपने क्रेडिट कार्ड UPI लिंकिंग की शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

QR कोड स्टैंडर्डाइजेशन

UPI QR कोड्स में एकरूपता लाने के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। अब सभी UPI ऐप्स एक ही QR कोड को स्कैन करके पेमेंट कर सकेंगे, जिससे व्यापारियों को अलग-अलग QR कोड रखने की जरूरत नहीं होगी। इससे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और भी सुविधाजनक बनेगा।

यूजर्स को क्या करना चाहिए?

इन नए नियमों को ध्यान में रखते हुए UPI यूजर्स को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले, अपनी KYC प्रक्रिया पूरी करें और सुनिश्चित करें कि आपके सभी डॉक्युमेंट्स अपडेट हैं। अपने UPI ऐप को नवीनतम वर्जन में अपडेट करें ताकि आपको सभी नई सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिल सके। अपने UPI पिन को नियमित रूप से बदलें और किसी के साथ शेयर न करें।

संदिग्ध लिंक्स या फोन कॉल से सावधान रहें जो आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं। हमेशा आधिकारिक UPI ऐप्स का ही उपयोग करें और थर्ड-पार्टी ऐप्स से बचें। अपने ट्रांजेक्शन हिस्टरी की नियमित जांच करें और किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।

निष्कर्ष

10 फरवरी 2026 से लागू होने वाले नए UPI नियम डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। हालांकि ये बदलाव कुछ यूजर्स के लिए शुरुआत में असुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये सभी के लिए फायदेमंद साबित होंगे। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे इन नए नियमों से अवगत रहें और अपने UPI अकाउंट्स को नियमों के अनुसार बनाए रखें। डिजिटल इंडिया की यात्रा में UPI एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और ये नए नियम इसे और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

You Might Also Like

Leave a Comment